महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है?

देश में बहुत से कर्मचारी सरकारी कर्मचारी होते है, जो सरकार द्वारा जारी चयन प्रक्रिया में शामिल होकर नौकरी करते है। इन्हीं कर्मचारियों के द्वारा सरकार अपनी शासन व्यवस्था चलाती है । देश की व्यवस्था चलाने में कर्मचारियों का विशेष योगदान रहता है। इनके कार्य करने के लिए सरकार द्वारा वेतन और कुछ भत्ते निर्धारित किये गए है। जैसे – जैसे कर्मचारी पुराना होता है जाता है वैसे – वैसे उसके वेतन और भत्ते में बढ़ोत्तरी होती रहती है।

इसे महंगाई भत्ता भी कहा जाता है, जो समय के अनुसार या फिर महगाई को देखते हुए प्रतिवर्ष बढ़ाया जाता है। महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारी को काफी रहत प्रदान करता है। यदि आप भी महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है, What is Dearness Allowance (DA) in Hindi, इसके विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो यहाँ पर जानकारी प्रदान की जा रही है।

महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है ?

सार्वजनिक क्षेत्र के सभी कर्मचारी, निजी क्षेत्र के कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी आदि को मुद्रास्फीति के प्रभाव से संतुलित रखने के लिए उनके मूल वेतन पर दिया जाने वाला वृद्धि को महंगाई भत्ता कहाँ जाता है, अर्थात् महंगाई की मार से बचाने के लिए कर्मचारियो को उनके एम्प्लायर द्वारा सालाना उनके बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की जाती है। महंगाई भत्ता को अंग्रेजी में Dearness Allowances कहते है।

डी.ए. (DA) का फुल फॉर्म

DA का फुल फॉर्म “Dearness Allowance” होता है, इसका उच्चारण “डेअरनेस अलाउंस” होता है इसे हिंदी में “महंगाई भत्ता” कहा जाता है, यह सरकार द्वारा निर्धारित वेतन पर महगाई के अनुसार प्रदान किया जाता है, जिससे कर्मचारी बिना किसी समस्या के अपनी जीविका चला सके। इसके अलावा सरकार द्वारा फॅमिली मेडिकल सुविधा यानि कि परिवार स्वास्थ्य सेवा भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा बच्चों की पढाई पर होने वाले खर्च को भी सरकार द्वारा दिया जाता है।

महंगाई भत्ता कैसे कैलकुलेट किया जाता है ?

साल में जुलाई व जनवरी माह में DA या महंगाई भत्ता की गणना की जाती है। इसके लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में Dearness Allowances Formula में बदलाव किया था। महंगाई भत्ता को एफओरमुला के द्वारा कैलकुलेट किया जाता है :-

DA = पिछले 12 महीने का CPI का औसत - 115.76 ➜ जितना आएगा उसे 115.76 से भाग दिया जायेगा ➜ जो अंक आएगा उसे 100 से गुना करे।

डी.ए. (DA) यानि की महंगाई भत्ता का इतिहास

महंगाई भत्ता यानि कि “Dearness Allowance” का आरम्भ दूसरे विश्वयुद्ध के समय हुआ था। जिसके अंतर्गत सिपाहियों को खाने और दूसरी सुविधाओं हेतु उनके निर्धारित वेतन के अलावा खर्च प्रदान किया जाता था। प्राप्त होने वाले इस खर्च के पैसे को उस समय खाद्य महंगाई भत्ता या डियर फूड अलावेंस के नाम से जाना जाता था। कर्मचारी के वेतन में जैसे – जैसे बढ़ोत्तरी होती थी, वैसे – वैसे भत्ते में भी इजाफा किया जाता था। भारत में सबसे पहले 1972 में मुंबई के कपड़ा उद्योग में महंगाई भत्ता लागू किया गया था। इसके उपरांत ही भारत सरकार ने भी सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने का एलान कर दिया था, ताकि देश में बढ़ती हुई महंगाई का असर सरकारी कर्मचारी पर न पड़ सके, इसलिए इसपर 1972 में ही एक कानून भी बनाया गया, जिससे कि ऑल इंडिया सर्विस एक्ट 1951 के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जाने लगे। इस तरह से भारत में भी महंगाई भत्ता लागू हो गया।

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